माधुर्य

tukaram_handeसंत तुकाराम की पत्नी ने उनसे कुछ खाने के लिए लाने को कहा।तुकाराम गए और शाम को एक गन्ने के साथ वापिस आये।देखते ही पत्नी बोल पड़ी पूरा दिन बहार रह कर भी तुम एक गन्ना लेकर आ गये क्या खेत और गन्ने नहीं थे या फिर तुम उठा नहीं सकते थे।तुकाराम ने कहा गन्ने तो वह काफी लाये थे लेकिन रास्ते में खेल रहे बच्चों में बाँट दिए।उसकी पत्नी ने गुस्से में गन्ना उठाया और तुकाराम की पीठ पर दे मारा।गन्ने के दो टुकड़े हो गये।

तुकाराम झुके और एक टुकड़ा पत्नी को दिया और दूसरा अपने मुहँ के पास ले जाते हुए बोले मैं सोच ही रहा था इसके दो टुकड़े करने की ,अच्छा हुआ तुमने कर दिए।पत्नी अपने व्यवहार पर शर्मिंदा थी और तुकाराम मग्न होकर गन्ने का आनन्द ले रहे थे।इसका ये अर्थ नहीं है कि हम गलत बातों को सहन करें तो ही खुश रह सकते है।हाँ इतना अवश्य है कि कभी -कभी हम कुछ सहन कर लेते है तो अपने जीवन में माधुर्य को भर लेते है।अपने रिश्तों को बचाने के लिए भी आपकी सहन शक्ति ही आपका साथ देती है।जीवन में माधुर्य बनाये रखने के लिए सबसे जरुरी है सहन शक्ति ,इसे बढ़ाएं और खुश हो जाएं।

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