भाग्य

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      तीन दोस्त जो नकारे घूमते थे ,एक बार भूख से व्याकुल हो सोचने लगे कि क्या करें ?उन्होंने जैसे -तैसे चीजें जुटाकर खीर बनाई।भरपेट खाने के बाद भी उनके पास एक प्याला खीर बच गई।तीनो इस बात को लेकर लड़ने लगे कि सुबह उठकर खीर कौन खाएगा ?आखिर तीनो ने तय किया कि जो रात में सबसे अच्छा सपना देखेगा वह ही खीर खायेगा।
        रात में  एक दोस्त को भूख लगी वह उठा और सारी खीर खाकर प्याला वही रखकर दोबारा सो गया।सुबह एक दोस्त ने अपना सपना बताया कि उसने सपने में भगवान राम -सीता व महादेव को देखा ,सभी ने मुझे आशीर्वाद दिया।दूसरा बोला ये तो कुछ भी नहीं मैने तो तैतीस करोड़ देवताओं के दर्शन किये और सभी ने मुझे आशीर्वाद दिए इसलिए खीर तो मै ही खाउगा।
         तीसरे ने उन्हें लड़ते हुए देख कहा मेरा सपना भी तो सुनो ,मैंने देखा कि हनुमान जी हाथ में गदा लेकर आये और बोले खीर पी नहीं तो मारूंगा सो मैंने डर के मारे खीर पीली। दोनों दोस्त बोले तू तो बड़ा स्वार्थी निकला अकेले ही खीर खा गया।तूने हनुमान जी से कहा नहीं कि मेरे दो दोस्त और भी है।उसने मासूमियत से कहा मैंने तो कहा था लेकिन हनुमान जी ने कहा वे अभी आशीर्वाद लेने में व्यस्त हैं इसलिए तू ही खीर पी ले।
      भाग्य उसी का साथ देता है जो कुछ करते है।खाली पड़े सपने देखने से किसी का भाग्य नही संवरता ,उसे बनाने के लिए हमें अपने भरसक प्रयास करने पड़ते हैं।हमें अपने जीवन में कुछ इस तरह काम करने चाहिए कि हम अपना भाग्य स्वयं बना सके न कि बने बनाये भाग्य का रोना रोते रहे।