मानवता

 

     एक बालक जो बहुत नटखट था ,हमेशा उछल कूद करता रहता था।एक बार वह अमरुद के पेड़ पर चढ़ गया ,पास ही खड़े उसके बड़े भाई ने देखा कि वह डाल टूटने वाली हैं जिस पर बैठकर वह बालक अमरुद खा रहा है।भाई के सचेत करने पर भी वह नहीं माना   आखिर भाई ने उसे थप्पड़ मारते हुए कहा कि आगे से ऐसे पेड़ पर नहीं चढ़ना ,नहीं तो बहुत पिटोगे।
      Gandhiji-smilingबालक रोते हुए माँ के पास गया और बड़े भाई की शिकायत करने लगा।माँ ने बालक से कहा जा तू भी उसे मार दे।बालक माँ और देखते हुए बोला मैं .ऐसा कैसे कर सकता हूँ।वह मेरा बड़ा भाई हैं। आप मुझे गलत बात कैसे सीखा सकती हैं।छोटे से बच्चे के मुहं से ऐसी बाते सुनकर माँ शर्मिंदा होते हुए बोली मैंने ऐसे ही तुझे शांत करने के लिए कह दिया था।
      बालक ने गंभीरता से कहा यदि माँ ही अपने बच्चे को सांत्वना देने के लिए गलत काम करने को कहेगी तो बच्चों में अच्छे संस्कार कौन डालेगा जिससे कि आगे चलकर बच्चे अपने माता -पिता व देश नाम रौशन कर सके।बच्चे को गले से लगाते हुए माँ ने कहा तू कोई साधारण बालक नहीं है।तू मेरा नाम अवश्य रोशन करेगा।
   इस अदभुत विभूति ने बड़े होकर मानवता का ऐसा पाठ पढाया कि उसने अहिंसा के बल पर अपने देश को गुलामी से मुक्त
कराके न सिर्फ अपने माता -पिता का गौरव बढाया बल्कि हमें भाईचारा सिखाया।उन्होंने जाति -पाती का भेद मिटाकर हमे एक जुट रहकर जीने के लिए  प्रेरित किया। अपनी सच्ची मानवता के कारण ही वे मरकर भी अमर हो गये है और हम सब प्रेम से उन्हें राष्ट्रपिता माहत्मा गाँधी कहते हैं। उन्हीं के कुछ शब्द —
        करे हम मानव का सम्मान ,करे हम मानव का सम्मान
       हर प्राणी है प्रभु की प्रतिमा ,हर घर है एक मंदिर
      मंदिर मस्जिद गिरजे सब है ,उसकी पूजा के घर
      हिन्दू मुस्लिम सिख इसाई ,सबका एक हो गान
   करे हम मानव का सम्मान ,करे हम मानव का सम्मान
मानवता के मन मंदिर में ,प्रेम का अमृत पान।