सपना

car      दो प्यारी बच्चियां रिजल्ट लेकर घर पहुचीं तो बहुत खुश थी क्योकिं वे बहुत अच्छे नम्बरों से पास हुई थी।उनकी दादी ने बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए उन्हें ईनाम देने की सोचते हुए पूछा मै तुम्हें क्या दूँ ?बड़ी बच्ची तो चुपचाप खड़ी रही परन्तु छोटी झट से बोली टाटा सियरा।दादी को कुछ समझ नहीं आया तो बच्चीं ने बताया कि यह बड़ी सी गाड़ी जिसमें एक साथ दस लोग बैठ सकते हैं। 

     दादी तो परेशान हो गई क्योकिं उन्हें अपनी आठ वर्षीय पोती से ऐसी मांग की उम्मीद नहीं थी।सो उन्होंने उसे टालने के लिए पास खड़े अपने बेटे से कहा कि इसे कोई खिलौना गाड़ी दिलवा देना।गाड़ी लेने की जिद्द पर अड़ी बच्चीं को उसकी माँ ने किसी तरह मना लिया।लेकिन उस नन्ही ब्च्चीं का सपना अब उसके पापा का सपना भी बन गया था।
     इस बीच उसके पापा का तबादला दूसरे शहर में हो गया।नयी जगह में नए सिरे से बसने की परेशानियों के बावजूद उसके पापा ने अपने सपने को जिंदा रखा और अपनी कंपनी में लोन के लिए प्रार्थना पत्र लगा दिया।ब्च्चीं ने सुना तो उसकी ख़ुशी का ठिकाना न रहा ,अब वह घर में आने वाले हर मेहमान को बताना न भूलती कि उसके पापा गाड़ी लेने वाले हैं।
         लोन सेक्सन  होने में कई महीने लग गये,लोगों ने  ब्च्चीं को चिढ़ाना शुरू कर दिया कि कहाँ है आपकी गाड़ी ,ऐसा कौन सा लोन ले रहें है तेरे पापा आज कल तो दस दिन में  लोन पास हो जाते हैं।पापा अपनी उदास ब्च्चीं को सांत्वना देते हुए कहते कि जल्दी ही हम कार ले लेगें।
        उनकी आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि वो बाहर से लोन ले कंपनी अपने कर्मचारी को कम ब्याज पर लोन देती थी इसीलिए वह अपनी कम आय के बावजूद अपने बच्चे का सपना पूरा करने की सोच पा रहे थे।आखिर वह दिन भी आया जब उन्होंने अपने बच्चों को टाटा सियरा तो नहीं पर तभी आई नई कार सेन्ट्रो उन्हें लाकर दी।और एक ऐसा भी दिन  आया जब  इन बच्चों के पास तीन गाड़ियाँ थी।
        इंसान अपने जीवन में  यदि अपने सपनों को याद रखे तो वे अवश्य पूरे होते हैं।सपने ही तो है जो हमें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते है।इसलिए सपने देखने से न डरे,सपने देखे और उन पर विश्वास करे।क्योकि जब हम सो रहे होते सपने तब भी अपना काम कर रहे होते है।सपनो के साथ जीने में ही हमारे जीवन की सार्थकता हैं।