स्पर्श


700-00519483एक माँ जो अपने बेटे से अलग रहने को विवश थी क्योकि उसके पति व बेटे की नहीं बनती थी।एक बार माँ को पता चला कि उसका बेटा कई दिनों से बीमार है और कोई दवाई असर नहीं कर रही है ,तो वह व्याकुल हो गई।उसने अपने पति से बेटे से मिलने की अनुमति चाही तो पति ने मना करते हुए कहा कि यदि तू उससे मिलने जाएगी तो मै तुझसे सम्बन्ध तोड़ लूँगा।
पति की बात से डरी हुई इस माँ का दिल हर वक्त अपने बीमार बेटे में ही लगा रहता।एक दिन सुबह अपने पति को नाश्ता देकर पूजा की थाली हाथ में लिए माँ मंदिर के बहाने घर से निकल गई।उसने लम्बा सा घुंघट निकाला और अपने बेटे के पास पहुँच गई,जो कई दिनों से बुखार में बेसुध पड़ा था माँ के कदमों की आहट से उठ गया।वर्षो बाद माँ को सामने पाकर बेटा भावुक हो गया।
माँ ने आगे बढ़कर बेटे के सिर पर हाथ फेरा,उसका स्पर्श पाते ही बेटे के कमजोर शरीर में नई शक्ति का संचार हो गया।बेटा उठा और अपनी माँ से लिपट कर रोने लगा।दूर खड़ी उसकी पत्नि माँ बेटे के इस मिलन को आश्चर्य से देख रही थी जिसमे न कोई गुस्सा न शिकायत बस प्यार ही प्यार था जिसके वशीभूत वे दोनों बस रोये जा रहे थे।
बेटे की सारी पीड़ा व महीनो पुराना बुखार माँ का स्पर्श पाते ही दूर हो गये थे।बेटे को ठीक देख माँ वहाँ से चल पड़ी और है।
रास्ते में बैठे भिखारी को पूजा का सामान देकर घर पहुंच गयी।पति को चुप देखकर उसने कहना शुरू किया कि मंदिर में ज्यादा भीड़ थी इस लिए देर हो गई ,पति जो कि पत्नि के पीछे जाकर सारा द्रश्य अपनी आखों देख चुके थे अपने आंसू छुपाते हुए बोले कोई बात नहीं,यदि तुम चाहो तो रोज मंदिर चली जाया करो।
माँ के स्पर्श के महत्व को हम सभी नें अपने जीवन में महसूस किया है।जब कभी भी हम मुश्किल में होतेहै तो माँ दूर होते हुए भी हमारी प्रेरणा बनकर हमारे साथ होती है।

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