मेहनत

     एक गरीब महिला ने अपनी व्यथा सुनाते हुए एक संत को बताया कि छोटी सी उम्र में ही उसका पति गुजर गया है।उसके पास किराया देने व खाने तक के पैसे नहीं है ,यदि आप कृपा करके मेरे लिए कुछ दिनों का इंतजाम कर दे तो आपका आभार होगा। संत ने मदद का आश्वाशन देते हुए कहा यदि मै तुम्हें काम दिला दूँ क्या तुम करोगी ? महिला के मानने पर संत ने उसे चपरासी की नौकरी पर लगवा  दिया।वहां काम करते हुए उसने कर्म के महत्व को जाना और अपनी कमाई से थोड़ी -थोड़ी बचत करके उसने काम के साथ पढाई भी की। आज वह महिला एक कालिज में अध्यापक है।develop-perseverance

सही सोच हो ,सही द्रष्टि हो सही हो कर्म हमारा।
बदले जीवन धारा। बदले जीवन धारा।
 मेहनत को ही दीप बनाये ,लग्न को समझे ज्योति।
पत्थर में से हीरा जन्मे और सागर से मोती।
बाधाओं से डरना कैसा ,मिलता स्वयं किनारा।
 बदले जीवन धारा , बदले जीवन धारा।
      जिन्दगी हमें स्वयं कुछ नहीं देती।हमें मेहनत करके ही अपना भाग्य बनाना पड़ता है।