अनुभूति

 

     एक लड़की जब अपने मायके जाती ,उसे अपने पिता की कोई न कोई बात बुरी लग जाती और वह अक्सर दुखी मन से वापिस लौट आती।कई बार सोचती ,अब नहीं जाऊँगी लेकिन माँ से मिलने का मोह उसे मायके खीच ले जाता।और फिर वही सब होता ,जो हमेशा से हो रहा था।उसकी अति संवेदन शीलता की वजह से उसके बच्चे भी अपने ननिहाल में रहने का सुख नहीं देख पाए।वह जब कभी मायके जाती तो उसकी माँ खुश होने के साथ डरी हुई भी रहती कि कही इस बार यह रोते हुए ही वापिस न लौट जाये।
Father-Daughter
            शादी के लगभग 24 साल बाद एक बार वह बिना किसी बात बुरा माने वापिस गयी तो उसकी माँ ने उसे बताया कि उसके पिता इस बात से बहुत खुश है कि आज उनकी बेटी ख़ुशी से विदा हुई।लड़की सोचने पर विवश हो गई कि वह अपने पिता की छोटी सी डाट को तो दिल से लगा लेती है ,लेकिन उस असीम प्यार को नहीं समझी  जो उनके दिल में अनवरत बसा है।
       उसकी माँ के अचानक हुए देहांत से दुखी पिता के लिए कुछ करना चाहती थी कि उसके पति की नौकरी चली गई।उसके पिता उससे मिलने आये तो उनकी आखों में  अपनी बेटी के भविष्य की चिंता साफ नजर आ रही थी।बेटी जिसे अपने पिता के प्यार की अनुभूति हो चुकी थी,बस इतना ही कह पाई कि उसे उनके आशीर्वाद की बहुत जरूरत है।पिता का प्यार बच्चो के लिए ऐसा साहस है जिसकी बदोलत वह बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकते  है।