अहंकार

एक नदी किनारे ऊचें पेड़ पर लगा एक नारियल अक्सर नदी पड़े एक पत्थर को बड़ी हीन द्रष्टि से देख कर कहता कि तेरी भी क्या जिन्दगी है,एक यूँ ही पानी में पड़े -पड़े कीड़े तुझे खा जाएगे।पत्थर उसकी अहंकार पूर्ण बाते सुनकर भी चुप रहता।एक दिन नारियल मंदिर पहुचां जहाँ उसे भगवान के सामने तोड़ा जाना था।उसकी नजर सामने रखे शालिग्राम भगवान पर पड़ी तो उसे अपनी सोच पर ग्लानि हुई।क्योकि जिसे वह तुच्छ समझ रहा था ,वह आज भगवान बनकर पूजा जा रहा था।और स्वयं वह जो उचे पेड़ पर रहकरहमेशा गर्व से अकड़ा रहता था ,आज तोड़ा जा रहा था।इसलिय इन्सान को कभी भी किसी को कम नहीं आकना चाहिए क्या पता कल हम किस स्थिति हो।हमें अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि अपने साथ -साथ हम दूसरों का भी भला कर सकें। इंसान को अपने अंहकार पूर्ण व्यवहार के कारण हमेशा शर्मिंदा होना पड़ता है।