संयम

एक साधरण सा दुकानदार था ,जिसके बारे में प्रसिद्ध था कि वह बहुत संयमी है।एक बड़ी मिल का मालिक उसकी परीक्षा लेने उसकी दुकान पर गया।उसने दुकानदार से कपड़ा दिखाने को कहा। लगभग डेढ़ घंटे तक वह एक के बाद दूसरा थान खुलवाता रहा और दुकानदार बिना संयम खोये उसे कपडे दिखाता रहा।आखिर ग्राहक ने आधा मीटर कपडा देने को कहा।  दुकानदार  ने ग्राहक को आधा मीटर कपडा देते हुए धन्यवाद दिया।

patience

            ग्राहक जो कि अभी तक उसका संयम देख कर बहुत प्रभावित हो चुका था।अपना असली परिचय देते हुए बोला मै तुम्हें अपनी कंपनी में विक्रेता के पद पर नियुक्त करता हूँ।क्या तुम यह काम करोगे ?दुकानदार ने सहर्ष काम करना शुरू कर दिया।अपने संयम के कारण एक साधारण सा दुकानदार आज लखपति बन गया था।
      आर्टियस वार्ड ने कितना ठीक कहा है जो लोग जल्दबाजी में अपना लक्ष्य पाने के लिए घोड़ा ,टट्टू ,खच्चर किसी पर भी सवार हो जाते है ,एक दिन मुहँ के बल गिरते है।इस लिए हमें हमेशा संयम के साथ अपना काम करना चाहिए।आत्मसंयम ही सफलता का मूल मन्त्र है।