एकाग्रता

           

         एक आदमी नदी किनारे सूर्य की पूजा में तल्लीन था कि उधर जा रहे एक जोगी बाबा ने उस पर पानी उछालना शुरू कर दिया।उस आदमी ने गुस्से में बाबा से कहा ,आपने पानी गिरा कर मेरा ध्यान भंग क्यों किया। बाबा तो  अंतर्मन को जानने वाले थे ,बोले तू तो जूते खरीदने में लगा था।पूजा कर ही कहाँ रहा था कि मैंने भंग कर दी? आदमी अपनी सोच पर शर्मिंदा हुआ क्योकि असल में पूजा करते समय उसके मन में नए जूते खरीदने का ही विचार आ रहा था।उसने बाबा से माफ़ी मागीं और आगे से अपने मन को एक्राग  करके काम करने का निश्चय किया।
         जब हम किसी काम को पूरी एकाग्रता से करते है तो हमें सफलता अवश्य मिलती है। हमे कोशिश करके अपने भटकते मन को रोक कर अपने लक्ष्य तरफ लगाना चाहिए ,ताकि हमें अपनी  मेहनत का पूरा फल मिल सके।