अनुगूँज

 

       एक बालक को उसकी माँ ने थप्पड़ मार दिया तो वह इतना नाराज हो गया कि घर छोड़कर चला गया।अपनी धुन में चलते हुए उसे पता भी नहीं चला कि वह एक भयानक जंगल में पहुँच गया हैं ,वह गुस्से में तमतमा रहा था और उसने जोर -जोर से चिल्ला कर बोला आई हेट यू —आई हेट यू।जब वह थोड़ा शांत हुआ तो उसके कानों में आवाज आई ,जैसे कोई उससे कह रहा हो आई हेट यू उसे समझ नहीं आ रहा था कि यह क्या हो रहा हैं।वह घबरा गया और अपनी माँ के पास जाकर बोला माँ जंगल के सारे लोग मुझसे नफरत करते हैं। माँ के पूछने पर उसने बताया कि किस तरह वह आई हेट यू कह रहा था कि तभी उसे जंगल के सारे प्राणी ईआइ हेट यू कहने लगे।
    माँ ने अपने बेटे को दुलारते हुए कहा बेटा ये कुदरत एक अनुगूँज हैं हम जो कुछ इसे देते हैं यह कई गुना हमें लौटा देती हैं।तुम चिंता न करो अब जंगल में सभी तुम्हें बहुत प्यार करेगें तुम वहाँ जाकर बोलना आई लव यू।बेटे ने ऐसा ही किया और वापिस आकर अपनी माँ से लिपटते हुए बोला माँ तुम कितनी अच्छी हो तुमने मुझे जंगल के प्राणियों से भी प्यार कैसे पा सकते हैं यह सिखाया हैं।आज जंगल में सभी ने मुझे कई बार प्यार से कहा आई लव यू।
     हम जैसे कर्म करते हैं वैसा ही फल हमें मिलता हैं क्योकिं यही कुदरत का नियम हैं।हम बिना वजह ही अपने भाग्य का रोना रोते रहते हैं कि हमारी किस्मत ही ख़राब हैं हमारे अनेक प्रयास भी हमें सफलता नहीं दिला पा रहे हैं।जबकि सच्चाई तो यह हैं कि हमनें अभी तक उतने प्रयास किये ही नहीं होते जितने कि उस काम की सफलता के लिए चाहिए थे।इसलिए हमें हमेशा अच्छे कर्म ही करने चाहिए और बुरे कर्मों से बचना चाहिए।कहते हैं कोई किसी के लिए कुआँ खोदता हैं तो कुदरत उसके लिए पहले से ही एक खाई तैयार कर देती हैं।मरने के बाद भी हमारे कर्म हमारा पीछा करते हैं और हमारा अगला जन्म भी हमारे कर्मो के अनुसार ही निर्धारित होता है और हमारा भाग्य भी हमारे कर्मो से ही लिखा जाता हैं।कुदरत एक अनुगूँज की तरह काम करती हैं यह हमें वही लौटती हैं जो हम इसे देते हैं।इसलिए हमें अपने जीवन परहित का ध्यान रखते हुए अच्छे कर्म करने चाहिए।