सुविचार

 

       एक आदमी ने सारी सुख -सुविधाओं से युक्त आलिशान घर बनाया।उसने उसे बनाने में लगभग अपनी सारी पूंजी लगा दी ,वैसे भी वह घर उसके सपनो का महल था जिसे सजाने में वह कोई कसर नहीं रखना चाहता था।वह हर पल अपने घर को बनते हुए देखता और उसमे रहने की कल्पना मात्र से ही अभिभूत हो जाता।कई महीनों तक घर बनता रहा और वह उस पल का इंतजार करता रहा जब गृहप्रवेश होगा।
      आखिर उसका इंतजार ख़त्म हुआ और उसने शुभ मुर्हत में अपने सगे संबंधियों को अपने गृहप्रवेश के लिए निमंत्रण देकर बुला लिया।सभी ने उसके घर की मुक्त कंठ से सराहना की ,और उसने भी सबकी बहुत अच्छी तरह आव-भगत की। सबने मंगल -गीत गांए और उस आदमी को अनेकों बधाइयाँ देते हुए उस अनुपम बेला का इंतजार करने लगे जिसमें गृहप्रवेश होना था।पूरा घर पकवानों की सुगंध से महक रहा था ,चारों और हँसी व ठहाकों की गूंज थी कि तभी घर के तल भाग में रखे एक सिलंडर में आग लग गई।जोर का धमाका हुआ और सभी लोग घर के बाहर आ गए और अपने अपने कयास लगाने लगे कि यह आवाज कैसी हैं।
     देखते -देखते उस आदमी के सपनों का महल धूं -धूं कर जलने लगा किसी की समझ में कुछ नहीं आ रहा था ,दमकलें आग बुझाने के लिए आ चुकी थी लेकिन आग काबू में नहीं आ रही थी और थोड़ी देर में ही वह सुन्दर घर राख के ढेर में बदल चुका था।सभी लोग अपने -अपने तरीके से सहानुभूति दिखाते हुए कह रहे थे बहुत बुरा हुआ ,कोई कह रहा था कि सारा पैसा व मेहनत बेकार हो गया आपका तो।उधर शांत भाव से वह आदमी ईश्वर का शुक्रिया अदा कर रहा था और कह रहा था ,हे ईश्वर !तेरी असीम कृपा हैं जो तूने मेरे परिवार व सगे संबंधियों को बचा लिया।इस घर को तो जलना ही था क्योकिं शायद यही इसकी नियति में तूने लिखा था लेकिन तू कितना दयालु हैं कि तूने हम सब को बचा लिया।
   उसके विचार सुनकर सभी लोग उस व्यक्ति के प्रति नत –  मस्तक हो गए और उसे प्यार से  गले लगाते हुए बोले जो आदमी ऐसे कठिन समय में भी  इतने सुन्दर विचार रखता हैं उसे घरो की क्या कमी ,तुम्हारें जैसे इंसानों पर तो ईश्वर अपनी विशेष कृपा करते है तुम्हें जल्दी इससे भी अच्छा घर मिलेगा।हमारे विचार ही हमारे चरित्र का आयना हैं हम जैसी सोच रखते हैं वैसा ही हमारा व्यक्तित्व बनता हैं।अपनी अच्छी सोच की वजह से एक इन्सान महान बन सबका प्रिय बन जाता हैं और दूसरा जो कि बुरे विचार रखता हैं सबकी घृणा झेलता हैं और जीवन भर दुखी रहता हैं।
   बुरे विचार हमारी प्रगति में बाधक होने के साथ हमारे सुकून ,हमारे मन की शांति भी भंग कर देते हैं।बुरे विचारों वाला व्यक्ति हमेशा अकेलेपन में जीता हैं क्योकि उसे कोई प्यार नहीं करता सब उसकी उपेक्षा करते हैं।इसलिए हमें अपने विचारो को हमेशा अच्छा रखना चाहिए।हमारे सदविचार हर समय हमें प्रगति की और अग्रसर करते हैं और हमारे चारों ओर हमें प्यार करने वालों को मौजूद रखते हैं जिसकी वजह से हम हमेशा अपने आपको खुश और प्रसन्न पाते हैं।सुविचार प्रसन्नता के खजाने की चाबी हैं इस लिए हमें हमेशा अपने अन्दर सभांल कर रखना चाहिए।