क्रोध

राजा खलीफा इतना क्रोधी था कि छोटी -छोटी गलतियों के लिए लोगों को मौत की सजा दे दिया करता था।एक बार जब वह नमाज पढ़ रहा था ,उसका गुलाम वहां से गर्म पानी का बर्तन लेकर गुजरा।गुलाम को ठोकर लगी और गर्म पानी की कुछ बुँदे राजा के ऊपर गिर गई।नमाज के बीच राजा बोल न सका लेकिन उसे बहुत गुस्सा आया।गुलाम डर कर वही बैठ गया और पास रखी कुरान को खोल कर पढने लगा।उसने जिस पेज को खोला था ,उसकी पहली आयत थी कि जन्नत उसी को मिलती है जो अपने ग़ुस्से पर काबू रखता है।नमाज के बीच ही राजा बोला ,मुझे क्या सुना रहा है मेरा गुस्सा मेरे काबू में है।गुलाम ने दूसरी आयत पढ़ीं जिसमे लिखा था जन्नत उसी को मिलती है जो गलती करने वालो को माफ़ कर देता है।राजा ने गुस्से से गुलाम की और देखा और कहा जा मैंने तुझे माफ़ किया।अब तो गुलाम की खुशी का ठिकाना न रहा उसने सोचा ,जब कुरान की दो आयेते मेरी जान बचा सकती है तो तीसरी भी पढ़ लेता हूँ।तीसरी आयत में लिखा था भगवान उन्हें प्यार करते है जो दूसरो के प्रति दयालु और करूणामय होते है।इतना सुनते ही राजा उठा और गुलाम को स्वर्ण मुद्राएँ देते हुए बोला मै तुझे गुलामी से आजाद करता हूँ।जिस तरह कुरान की छोटीसी  बात ने राजा को सोचने के लिए बाध्य कर दिया।क्या हम भी अपने गुस्से काबू करके अपने जीवन में होने वाले विनाश को नहीं रोक सकते।एक पल का गुस्सा इन्सान का मान ,विवेक ,सुख ,शांति ,संबंध ,कैरियर सब कुछ चौपट कर सकता है।इसलिय कोशिश करके हमें अपने गुस्से का त्याग करना चाहिए।