तपस्या

एक मुनि जंगल में कुटिया बनाकर रहते थे।उन्होंने छोटी सी उम्र में ही संसार का त्याग कर तपस्या करना शुरू कर दिया था।जंगल में उत्पन्न कंदमूल फल खाकर जीवन यापन करते हुए अपने तप के बल पर अनेक सिद्धियाँ पा ली थी।एक बार वह बहुत बीमार हो गए .आस पास के गाँव वालो ने उनकी बहुत सेवा की लेकिन उन्हें बचा ना सके। स्वर्ग में मुनि का भव्य स्वागत हुआ और उन्हें स्वर्ण मुकुट पहनाया गया। तभी उनकी नज़र कुछ ऐसे मुनियो पर पड़ी जिन्होंने हीरे मोती जडित मुकुट पहन रखे थे।मुनि को आश्चर्य हुआ कि स्वर्ग में भी भेदभाव।उन्होंने अपनी जिज्ञासा शांत करने के लिए स्वर्गाधिपति से पूछा, प्रभु कुछ मुनियो के मुकुट में हीरे मोती है और कुछ के सिर्फ स्वर्ण के है ऐसा क्यों?स्वर्गाधिपति ने उत्तर दिया कि जिन मुनियो ने तपस्या के साथ साथ दुखी लोगो के आंसू पोंछे है उनके मुकुट में वे आंसू हीरे मोती बनकर चमक रहे है इसलिए तपस्या का महत्व  सिद्धियाँ प्राप्त करने में नहीं अपितु दुसरो के दुःख दर्द बांटने में है।