जीने का ढंग

 

     एक बार कुछ दोस्त समुंद्र किनारे घूमने गए।वहां उन्होंने देर रात तक शराब पी और जब सभी नशे में मदहोश हो गए तो बोले अभी घर जाकर क्या करेगें क्यों न समुंद्र की सैर का मजा ले।सब नाव में सवार हो गए सारी रात बारी -बारी से पतवार चलाते रहे।सुबह उन्हें लगा कि अब तो हमारा नशा लगभग उतर चुका है और हम नाव चलाकर थक भी गए हैं क्यों न घर चले।दो दोस्त नीचे उतरे और जोर -जोर से हँसने लगे ,बाकि के दोस्तों ने पूछा कि क्यों हँस रहे हो तब उन्होंने बताया कि हमने नाव का लंगर तो खोला ही नहीं।बस हम सब भी इन शराबी दोस्तों की तरह अपनी जिन्दगी का लंगर खोले बैगर बस जीये जा रहे हैं।
     हममें से ज्यादातर लोग बिना किसी उद्देश्य के अपना जीवन जीते हैं और एक दिन अपने जीवन के वे अनमोल साल जिनमे हम बहुत कुछ कर सकते थे, बस यूहीं खाने सोने में बिताकर इस दुनिया से रुखसत हो जाते हैं।न हम अपने लिए खाने -पीने के नियम बनाते हैं नहीं सोने और दूसरे कामों के लिए कोई निश्चित समय निर्धारित करते हैं।जब जो खाने का मन किया खा लिया ,जब सोने का मन हुआ सो गए और जब कुछ करने का मन हुआ कर लिया नहीं तो कल पर टाल दिया।इस जीवन शैली ने सबसे ज्यादा नुकसान हमारी आने वाली पीढियों का हो रहा हैं ,एक मासूम को रात के 11 ,12 बजे तक सोने का माहौल नहीं दिया जाता और फिर उसे सुबह 5 ,6बजे उठाकर खड़ा कर दिया जाता हैं कि जल्दी उठो नहीं तो स्कूल बस निकल जाएगी।अक्सर माता पिता यह शिकायत करते मिल जायेगें कि हम क्या करे हमारा बच्चा रात में जल्दी नहीं सोता हैं।वे अपने आपसे पूछे क्या क्या वे अपने बच्चे को सही समय पर नाश्ता खाना दे रहे हैं और यदि दे रहे हैं तो क्या पौष्टिकता व शुद्धता का ध्यान रख रहे हैं ?
सच तो यही हैं कि हम न अपने बच्चों को वह खाना दे रहे जो उनके सही विकास में सहायक हो और न वह माहौल दे रहे हैं जिसमे पल कर बच्चा ऐसे संस्कार पा सके कि बड़ा होकर वह सही और गलत में फर्क कर सके।
आज हमारे पास सब सुख साधन होते हुए भी जीवन में सुकून नहीं हैं ,रिश्तों में अपनापन नहीं हैं।आज का इन्सान ज्यादा होशियार व कर्मशील हो गया हैं ,अब लोग सिर्फ दिन में ही नहीं अपितु रात में भी काम करते हैं ,और पति -पत्नी दोनों कमाने लगे हैं।पैसा खूब हैं लेकिन अपनेपन के लिए तरस रहे हैं कोई नहीं समझ रहा हैं कि कितना जरुरी हैं कि अपनों के साथ बैठ कर प्यार के दो बोल बोले और उन्हें बताये कि हम उन्हें बहुत प्यार करते हैं।कमियां सबमें होती है परन्तु यदि हम अपने रिश्तों को अच्छा बनाना चाहते हैं तो हमें अपनों कि कमियों को नजरंदाज करके उनके गुणों सराहना होगा तभी हम एक सुखी परिवार बना सकेगे।हमें अपने जीवन खाने -पीने ,सोने व काम करने के भी कुछ नियम बनाने चाहिए ताकि हम अपने बच्चों को एक अनुशासित जीवन दे सके।उनके जीने के ढंग से लोग प्रेरणा ले नकि उन्हें बात -बात पर धिक्कारे।यदि हर परिवार प्यार के साथ -साथ जीने के ढंग को ठीक कर ले तो वह दिन दूर नहीं जब हमारे देश में चारों और खुशहाली और प्रगति होगी।