अंकुश

 

      एक संभ्रांत परिवार में रात के समय पुलिस ने दरवाजा खटखटाया तो मालिक ने दरवाजा खोलते ही पूछा कि मेरे घर क्यों आये हो ?पुलिसवाले ने बताया कि आपके बेटे को गिरफ्तार करने आये है।यह सुनकर हैरान पिता ने फिर पूछा कि मेरे बेटे ने ऐसा क्या कर दिया कि आप उसे पकड़ने आ गए।पुलिसवाले ने कुछ फोटो दिखाते हुए कहा कि आज शाम को आपके बेटे और उसके साथियों ने मिलकर इन बच्चियों के साथ पार्क में जाकर बदतमीजी की है।इसके दोस्तों को तो हम पकड चुके है ,अब इसकी बारी है।
      हैरान -परेशान पिता ने अपने बेटे के कमरे में जाकर पूछा क्या तुम आज पार्क गए थे ?बेटे ने कहा हाँ गया था।पिता ने पूछा क्या तुमने वहां बच्चियों से छेड़खानी की ?बेटा घबराया कि उसके पिता को कैसे मालूम हुआ ,उसने शर्म से सिर झुका लिया और कुछ नहीं बोला।पिता ने बेटे को पुलिसवाले को सौंपते हुए दस हजार रूपये दिए।पुलिसवाले ने सोचा कि पिता अपने बेटे को बचाने के लिए हमें रिश्वत दे रहा है।पुलिसवाले के कुछ बोलने से पहले ही पिता बोल पड़े कि ये पैसे मैं इसलिए दे रहा हूँ कि मेरे बेटे की इतनी पिटाई करना कि फिर कभी मेरे घर पुलिस न आये।
     काश इस पिता की तरह ही हर माँ -बाप हो जो अपने बच्चों को उनकी गलती का दंड भी भुगतने दे ,ताकि आगे जीवन में वे गलतियाँ करने से पहले सोचे कि इसकी सजा भी हमें ही मिलनी है।जबकि अक्सर माता -पिता अपने बच्चे के मोह के वशीभूत होकर इतने कमजोर हो जाते हैं कि उसी नालायक बच्चे के सामने गिडगिडाने लगते है और उससे दया की भीख मांगने लगते हैं कि तू जो चाहेगा करेगें बस हमें समाज में बेइज्जत मत कर।एक दिन ऐसा भी आता हैं जब यह बच्चा अपना नुकसान तो करता ही हैं अपने परिवार को भी किसी लायक नहीं छोड़ता क्योकिं उसे लगने लगता हैं कि उस पर अंकुश रखनेवाले उसके माँ -बाप तो उसके प्यार में अंधे होकर विवश हो चुके हैं। इसलिए वह मनमानी करते हुए अपना जीवन बर्बाद कर लेता हैं।
     हमें यदि अपने बच्चों को एक खुशहाल जीवन देना हैं तो उन्हें सुख -सुविधाओं के साथ अंकुश भरा व्यवहार भी करना होगा ताकि बच्चे इतने गुस्ताख न हो जाए कि गलत सही में भेद ही न कर सके और कुछ काम तो सिर्फ इसलिए करे कि उन्हें इसे करने में मजा आता है।बच्चें माँ -बाप की जान होते है और ईश्वर का दिया वह अनुपम उपहार होते है जिनके आने से हमारे जीवन में ख़ुशी आ जाती हैं और हम अपने आपको एक जिम्मेदार व्यक्ति के रूप में परिवर्तित हुआ पाते है।इसलिए ईश्वर की इस सुन्दर कृति को हमें प्यार के साथ सभांलते हुए इन पर अंकुश भी रखना चाहिए ताकि बच्चे नादानी में अपना अहित ना कर सके।