परीक्षा

Shuja_Shah_Durrani_of_Afghanistan_in_1839_m

        एक राजा की नजर में दो विद्वान व्यक्ति ऐसे थे ,जिनमे वह अपने भावी प्रधानमंत्री को देखता था।इनमें से कौन अधिक योग्य हैं यह जानने के लिए राजा ने उन्हें बुलाकर दोनों को एक -एक डिब्बी देकर एक को जयपुर के राजा पास और दूसरे को उदयपुर के राजा के पास जाने को कहा।
   पहले व्यक्ति से रत्नजडित डिब्बी पाकर राजा ने खुश होते हुए खोला तो उसमें से एक सोने की डिब्बी निकली।राजा ने उत्सुकता से डिब्बी को खोला कि जरुर इसमें कोई कीमती वस्तु होगी ,लेकिन उसमें राख देखकर वह भड़क गया कि तुम्हारे राजा की इतनी हिम्मत की हमें भेंट में राख भिजवाये।और राजा ने गुस्से में राख उस व्यक्ति पर फेकते हुए कहा कि इसे धक्के देकर निकाल दो।व्यक्ति भी अपने राजा को दोषी मानते हुए वापिस लौट आया।
   अब दूसरा व्यक्ति उदयपुर के दरबार में पंहुचा और राजा को डिब्बी भेंट में दी।डिब्बी में राख देखते ही यहाँ का राजा भी क्रोधित हो उठा।व्यक्ति ने अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए कहा महाराज !यह राख नहीं हैं यह हमारे यहाँ की देवी का प्रसाद हैं ,जो भी व्यक्ति इसे श्रद्धा से पानी में घोलकर पी लेता हैं माँ की कृपा से उसके सारे काम बन जाते हैं।इसलिए आपकी भलाई के लिए ही हमारे राजा ये अनमोल उपहार आपके लिए भेजा हैं।
    राजा ने खुश होकर गंगाजल मंगवाया और राख को उसमें घोलकर पी लिया।और उस व्यक्ति को अपना कीमती हार देते हुए कहा कि अपने राजा को हमारी ओर से धन्यवाद देना।वापिस आने पर राजा ने उसे अपना प्रधानमंत्री नियुक्त कर लिया।
     जिंदगी के इस सफ़र में हमें भी अनेक परीक्षाओं से गुजरना पड़ता हैं। यदि हम भी अपनी बुद्धि का प्रयोग करते हुए हिम्मत के साथ इस सफर में आगे बढ़ते रहे तो सारी मुश्किलों को पार करते हुए एक दिन मंजिल तक अवश्य पहुँच जायेगें।