मनोबल

olivier

   एक छोटे से राज्य पर किसी शक्तिशाली राजा ने हमला बोल दिया।राज्य के सेनापति ने आकर अपने राजा से कहा महाराज शत्रु की विशाल सेना का सामना हमारे चंद सैनिक कैसे कर पायेगें ?इसलिए अच्छा होगा कि हम आत्मसमर्पण कर दे।राजा ने भी इसे ही उचित समझते हुए नगर में मुनादी करा दी कि कल सुबह हम आत्मसमर्पण कर देगें।
       इसी नगर में वर्षो से रह रहे एक साधु जब यह सब सुना तो उन्हें बड़ा दुःख हुआ कि हमारे राजा ने बिना लड़े ही हार मान ली।वे सुबह सबसे पहले राजसभा में जाकर राजा से बोले राजन !मैंने रात सपने देखा कि हमारी छोटी सी सेना ने शत्रु की बड़ी सेना को हरा दिया हैं और देवी माँ ने स्वयं आकर उन्हें आशीर्वाद दिया हैं।
    राजा ने निराश स्वर में कहा प्रभु सपने भी कभी सच होते है ,आपके पास क्या प्रमाण है कि देवी माँ आई थी ?साधु ने एक सिक्का दिखाते हुए कहा कि यह माँ ने मुझे दिया हैं और बताया है कि इसके उछाले जाने पर यदि यह सीधा गिरेगा तो जीत हमारी होगी।राजा  के कहने पर जैसे ही साधु ने सिक्का उछाला तो सीधा सिक्का देखकर राजा के साथ -साथ सैनिक भी जोश से भर गए।लेकिन सेनापति अभी भी डरा हुआ नजर आ रहा था।राजा ने स्वयं आगे बढ़कर अपनी सेना की अगवाई की और पूरे जोश के साथ शत्रु का सामना किया।
       युद्ध में एक समय ऐसा भी आया जबकि शत्रु पक्ष हावी हो गया ,साधु ने सिक्का निकालकर उछाला  और सभी को दिखाया कि देखो ये तो सीधा हैं इसलिए जीत तो हमारी ही होगी।एक बार फिर सेना ने अपनी पूरी ताकत के साथ शत्रु पर धावा बोलकर उन्हें भगा दिया।
     चारों ओर राजा की जय -जयकार होने लगी।राजा ने साधु की जय करते हुए कहा कि इस जीत का श्रेय आपको जाता है।साधु ने विन्रमता से कहा राजन !आज युद्ध में सैनिको का मनोबल जीता है जिसे जगाने में इस छोटे से सिक्के ने महत्व पूर्ण भूमिका निभाई है।और इसके साथ ही साधु वह सिक्का दिखाया जो कि दोनों ओर से सीधा था।
      विपरीत परिस्थितियों से बाहर निकलने में हमारा मनोबल ही हमारा सच्चा सहायक होता है। हमें अपने मनोबल का साथ कभी नहीं छोड़ना चाहिए।