प्रतिभा

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   प्रिंसिपल ने टीचर को निर्देश देते हुए कहा कि परीक्षा में स्कूल के मालिक के बेटे को हर हाल में पास करना है।टीचर ने सुना और बिना कुछ कहे वहां से चला गया।रिजल्ट आने पर मालिक के बेटे को अनुतीर्ण देखकर प्रिंसिपल ने टीचर को बुलाकर पूछा कि तुम्हें पता है कि तुम्हारी इस गलती की क्या सजा मिल सकती हैं ?
       टीचर ने बिना डरे कहा सर !मुझे पता हैं इसलिए मैं अपना इस्तीफा साथ लाया हूँ।प्रिंसिपल ने उसे समझाते हुए कहा ,जाकर इस रिजल्ट को ठीक करके मालिक के बेटे को पास कर दो।टीचर ने क्षमा मांगते हुए कहा सर मैंने उसे उसके काम के पूरे नंबर दिए हैं।मैं आपके कहे अनुसार करता हूँ तो यह उन  बच्चों के साथ नाइंसाफी होगी जिन्होंने पूरे साल मेहनत से पढाई की हैं।
 प्रिंसिपल ने टीचर को डांटते हुए कहा तुम्हें पता हैं तुम इस तरह अपना कितना नुकसान कर रहे हो ,नौकरी से निकाल दिए जाने के बाद कहाँ जाओगे ?टीचर ने शांत स्वर में कहा सर अमेरिका जाऊंगा।प्रिंसिपल आपा खोते हुए बोले पागल हो गये हो वहाँ तुम्हे कौन नौकरी देगा ?टीचर ने  गंभीर होकर कहा सर !रोकेगा भी कौन ?
    प्रिंसिपल टीचर के भीतर छुपी प्रतिभा को पहचान गया था।उसने खड़े होकर उससे अपने व्यवहार के लिए माफ़ी मांगते हुए कि तुम कहीं नहीं जाओगे।तुम्हारें जैसी प्रतिभा का स्कूल का मालिक क्या बिगाड़ेगा ?अबजो होगा देखा जायेगा तुम जाकर अपना काम करो।
    हमें गुलाब के फूल की तरह बनना चाहिए जैसे कि उसे किसी मंदिर में चढ़ाये या कब्र पर हमेशा एक जैसी खुशबू देता हैं । इसी तरह कैसी भी परिस्थितियाँ आये इन्सान की प्रतिभा उससे कोई नहीं छीन सकता।बस जरूरत है कि हम  बिना डरे अपनी  प्रगति के मार्ग पर आगे बढ़ें और अपने अंदर छिपी प्रतिभा को पहचाने ।ईश्वर ने अपने हर बन्दे को किसी न किसी प्रतिभा के साथ धरती पर उतारा है।आइये !हम अपनी -अपनी प्रतिभा के साथ सफलता की ओर बढे और ईश्वर को धन्यवाद दे इस बेहतरीन उपहार के लिए।
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