आवेश

 

         मुनि जी जो कि बहुत व्रत -उपवास करते थे और पाठ -पूजा में ही लगे रहते थे। एक दिन अपने शिष्य के साथ स्नान के लिए जा रहे थे कि उनके पैर के नीचे एक मेंढक आकर मर गया।शिष्य ने गुरु जी को कहा प्रभु आपसे अनजाने में मेंढक मर गया है ,आप भगवान से क्षमा मांग लीजए।मुनि तो अपनी धुन में थे सो उन्होंने उसकी बात पर ध्यान नहीं दिया।Why-We-Shout-In-Anger-wallpaper-Indian-saints
                दोपहर में मुनि जी खाना खाने बैठे तो शिष्य ने उन्हें फिर याद दिलाते हुए कहा ,कि वे क्षमा मांग ले किन्तु गुरु जी ने अब भी अनसुना कर दिया।शिष्य रात में गुरु जी के चरण दबाते हुए बोला ,प्रभु आप दिनभर इतना जप -तप करते है ,इतने परोपकार करते है इसलिए मैं आपके बारे में बहुत चिंतित हो रहा हूँ कि कही अनजाने में हुई भूल से आपके पुण्य खत्म न हो जाए।इसलिए आप क्षमा मांग लीजिए।
     उसकी बात सुनते मुनि जी अपना आपा खो बैठे और पास ही पड़े एक डंडे को उठाकर शिष्य को मारते हुए कहने लगे मैं सुबह से सुन रहा हूँ कि क्षमा मांग लूँ ,मुझे बता गुरु मैं हूँ या तू।मुझे समझाने वाला तू कौन होता हैं ?मुनि जी अपने आवेश में बोले जा रहे थे और पास खड़ा उनका शिष्य उन्हें देख कर रोये जा रहा था क्योकि अपने क्षनिक आवेश के कारण गुरु जी अपने पुण्यों से रहित होकर सांप के रूप में परिवर्तित हो चुके थे और धरती पर पड़े फुंफकार रहे थे।
        जीवन में हम सभी भी इस तरह की भूल करते रहते है और बाद में पछताने के अलावा हमारे पास कुछ नहीं होता।इसलिए जब भी क्रोध आये तो अपने आप पर संयम रखते हुए अपना व्यवहार संतुलित रखे ताकि बाद में हमें अपने कहे शब्दों के लिए शर्मिंदा न होना पड़े।