पुरुषार्थ

एक राजकुमार बाजार गया तो उसकी नजर एक दुकान पर पड़ी जिस पर लिखा था यहाँ अक्ल मिलती है।राजकुमार दुकान में गया और दुकानदार से अक्ल देने के लिए कहा।दुकानदार ने एक कागज पर कुछ पंक्तिया उसे लिख कर राजकुमार को देते हुए कहा ये लो अक्ल और एक लाख रुपये दे दो।राजकुमार को यह कीमत ज्यादा लगी लेकिन फिर भी दुकानदार के अड़े रहने उसने उसे पैसे दिए और उस अक्ल लिखे कागज को अपने कमरे की दीवार पर लगा दिया।वह जब तब इस अक्ल को पढ़ लिया करता था।एक बार उसे राज्य के काम काफी सालों के लिए परदेस जाना पड़ा।उसकी पत्नि व बच्चा राजमहल में ही रहे।अपना कम ख़त्म करके राजकुमार जब अपने राज्य में पंहुचा तो रात हो रही थी। वह सीधा अपने कमरे की और गया,वहाँ उसने अपनी पत्नि के साथ किसी पुरुष को सोते हुए पाया।उसने सोचा मेरे पीछे यह तो दुष्चरित्र हो गयी है।क्रोध में उसने तलवार निकली और जैसे उसने उन दोनों को मारने के लिए हाथ बढ़ाया कि उसकी नज़र दीवार पर लगी अक्ल पर पड़ी जिसमे लिखा था ,विवेकपूर्ण संयत पुरुषार्थ से सफलता मिलती है ,ख़ुशी व संपदा हमारे साथ रहती है।जबकि अविवेकपूर्ण कार्य करके हमें पछताना पड़ता है।उसने सोचा इन्हें सज़ा तो मैं बाद में भी दे सकता हूँ।पहले जान तो लूँ कि ये है कौन।उसकी पत्नि ने बताया कि वह पुरुष उसी का पुत्र है जिसे बाल्यावस्था में ही छोड़कर वह विदेश चला गया था।इतना सुनते ही उसके हाथ से तलवार गिर गई उसे उस अक्ल की कीमत अब कम लग रही थी क्योकि उसकी एक पंक्ति नेउसके परिवार को बचा लिया था।