Monthly Archives: February 2013

दान

एक व्यापारी जो हमेशा अपने व्यापार को बढ़ाकर धन एकत्रित करने में लगा रहता था।एक बार सौभाग्य से उसे सत्संग में जाने का मौका मिला।वहां उसने दान के महत्व के बारे में सुना ,उसे ज्यादा कुछ तो समझ नहीं आया बस एक बात याद रही कि दान देने से धन और बढ़ जाता है इसलिए उसने दान देने का मन बनाया।उसने अपने नौकर को बुलाकर कहा कि सस्ता अनाज खरीद लाये।नौकर अपने मालिक के कहे अनुसार सस्ता सडा गला अनाज ले आया।व्यापारी की बहू ने जब यह सुना कि यह सडा हुआ अनाज उसके ससुर दान में दे रहे है तो उसने नौकर से थोडा अनाज घर में लाने के लिए कहा।बहू ने उस सड़े अनाज को पिसा और उससे रोटी बनाकर अपने ससुर के सामने परोस दी।व्यापारी ने पहला टुकड़ा मुहँ में रखा तो उसे उसमे बदबू आई और उसने बुरा सा मुहं बनाकर किसी तरह खा लिया।फिर उसने जैसे ही दूसरा टुकड़ा मुहं में रखा उसे उबकाई आने लगी।वह खाना छोड़कर उठ खड़ा हुआ और चिल्लाने लगा इतना ख़राब आटा कहाँ से आया।बहु जोकि चुपचाप सब देख रही थी ,धीरे से बोली पापाजी आपने दान के लिए जो अनाज मंगाया है यह उन्ही का आटा है। व्यापारी को अपनी गलती का अहसास हो गया था।उसने सारा सडा हुआ अनाज फिकवा दिया और अच्छा अनाज मंगाकर गरीबों  में बांटा। अब उसे दान का सही महत्व समझ में आ गया था।

स्वर्ग नरक

एक सैनिक संत के पास जाकर गुस्से से बोला ,स्वर्ग नरक क्या है? संत कुछ नहीं बोले।सैनिक को यह अपना अपमान लगा।वह गुस्से मे जोर -जोर से चिल्लाने लगा बोल नहीं तो मै तेरे टुकड़े -टुकड़े कर दूँगा। संत फिर भी चुप रहे।सैनिक ने तलवार निकली और संत को मारने दौड़ा ,संत मुस्कराते हुए बोले यहीं नरक है। सैनिक को अपने व्यवहार पर अफ़सोस हुआ वह माफ़ी माँगने लगा।संत शांत बैठे रहे।वह गिडगिडा कर संत के चरणों में गिर पडा ,संत बोल उठे यहीं स्वर्ग है।हम अपने व्यवहार से ही अपने लिए स्वर्ग और नरक बनाते है।घर में हर समय अपनी तानाशाही चलाने वाले इन्सान से हर कोई अपनी जान बचाने लगता है।जबकि प्यार से सबकी बात सुनकर अपनी राय देने वाले से सब मदद मांगते है।इसलिय संतुलित व्यवहार के साथ जीवन जिए और सबके प्रिय बने।

व्यवहार

बरातियो की आव भगत में कमी देखकर वर के पिता ने लड़की के पिता से शिकायत की।लड़की के पिता ने माफ़ी मांगते हुए कहा कि आप चिंता ना करें मैं अभी सारी व्यवस्था ठीक कराता हूँ।लेकिन वर का पिता अकड़ा रहा और गाली देते हुए बोला अब यह शादी नहीं होगी।लड़की के सारे रिश्तेदारों ने माफ़ी मांग ली लेकिन वह नहीं माना।आख़िरकार लड़की से अपने घर वालो की ऐसी बेइज्जती सहन नहीं हुई।उसने अपने पिता से कहा पिताजी आप मुझे ऐसे लोगो के साथ क्यों भेजना चाहते है जिन्हें ठीक से व्यवहार करना भी नहीं आता। लड़की की बात सुनते ही वर का पिता आग बबूला हो गया और बारात वापस ले गया। कुछ महीनो पश्चात् लड़की की शादी दूसरी जगह हो गयी लेकिन वह लड़का कुंवारा ही घूम रहा है।उसके पिता के थोड़ी देर के गलत व्यवहार के कारण उनका परिवार बदनाम हो गया।अब कोई उनसे रिश्ता जोड़ना ही नहीं चाहता।हमे अपने व्यवहार को संतुलित रखना चाहिए एक मिनट का गलत व्यवहार हमारे वर्षो पुराने रिश्ते छीन लेता है और हमारे पास रह जाता है सिर्फ पश्चाताप।

फोबिया

एक प्यासा युवक अपनी नानी के घर पंहुचा तो नानी ने पीने के लिए छाछ दी।युवक के जाने के बाद नानी ने छाछ के बर्तन में मरा हुआ सांप देखा तो उसका मन अनिष्ट की आशंका से कांप उठा।वह अपने नाती की सलामती के लिए दुआए करने लगी।फिर भी उसका दिमाग तो यही मान रहा था कि अब उसका नाती नहीं बचेगा।कुछ महीनो बाद अपने नाती को सही सलामत अपने सामने खड़ा देखा तो नानी के आश्चर्य और ख़ुशी का ठिकाना न रहा।उसने अपने नाती को वह सांप वाली बात बता दी ,जिसे इतने दिनों से कुछ नहीं हुआ था।अचानक उस युवक को अपने शरीर में  कंपकपी महसूस होने लगी और उसे वहम हो गया कि उसके शरीर में जहर है ,अब वह नहीं बचेगा।उसका बहुत इलाज कराया गया लेकिन वह कुछ दिनों में ही चल बसा।डाक्टरों को उसकी बीमारी समझ नहीं आई।और उन्होंने उसकी बीमारी का नाम फोबिया रख दिया।आज हर प्राणी एक न एक फोबिये के साथ जी रहा है।किसी को मोटापे से डर तो कोई अच्छे लुक के लिए परेशान किसी को अनावश्यक रूप अपने ऊपर लादी गई मासिक किश्तों की चिंता ,तो कोई अपने आगे बढते  साथी को देखकर दुखी।हर किसी ने दुखी होने के बहुत रास्ते खुद तलाश लिए है।कितना अच्छा हो यदि हम अपने मन में घर कर गए संदेहों को निकाल कर हमेशा स्वस्थ व प्रसन्न रहे।ताकि जो भी हमें मिले उसे इतना अच्छा लगे कि वह अपने अन्दर ख़ुशी महसूस करे औरहमेशा मिलना चाहे ।

पुरुषार्थ

एक राजकुमार बाजार गया तो उसकी नजर एक दुकान पर पड़ी जिस पर लिखा था यहाँ अक्ल मिलती है।राजकुमार दुकान में गया और दुकानदार से अक्ल देने के लिए कहा।दुकानदार ने एक कागज पर कुछ पंक्तिया उसे लिख कर राजकुमार को देते हुए कहा ये लो अक्ल और एक लाख रुपये दे दो।राजकुमार को यह कीमत ज्यादा लगी लेकिन फिर भी दुकानदार के अड़े रहने उसने उसे पैसे दिए और उस अक्ल लिखे कागज को अपने कमरे की दीवार पर लगा दिया।वह जब तब इस अक्ल को पढ़ लिया करता था।एक बार उसे राज्य के काम काफी सालों के लिए परदेस जाना पड़ा।उसकी पत्नि व बच्चा राजमहल में ही रहे।अपना कम ख़त्म करके राजकुमार जब अपने राज्य में पंहुचा तो रात हो रही थी। वह सीधा अपने कमरे की और गया,वहाँ उसने अपनी पत्नि के साथ किसी पुरुष को सोते हुए पाया।उसने सोचा मेरे पीछे यह तो दुष्चरित्र हो गयी है।क्रोध में उसने तलवार निकली और जैसे उसने उन दोनों को मारने के लिए हाथ बढ़ाया कि उसकी नज़र दीवार पर लगी अक्ल पर पड़ी जिसमे लिखा था ,विवेकपूर्ण संयत पुरुषार्थ से सफलता मिलती है ,ख़ुशी व संपदा हमारे साथ रहती है।जबकि अविवेकपूर्ण कार्य करके हमें पछताना पड़ता है।उसने सोचा इन्हें सज़ा तो मैं बाद में भी दे सकता हूँ।पहले जान तो लूँ कि ये है कौन।उसकी पत्नि ने बताया कि वह पुरुष उसी का पुत्र है जिसे बाल्यावस्था में ही छोड़कर वह विदेश चला गया था।इतना सुनते ही उसके हाथ से तलवार गिर गई उसे उस अक्ल की कीमत अब कम लग रही थी क्योकि उसकी एक पंक्ति नेउसके परिवार को बचा लिया था।

 

माधुर्य

tukaram_handeसंत तुकाराम की पत्नी ने उनसे कुछ खाने के लिए लाने को कहा।तुकाराम गए और शाम को एक गन्ने के साथ वापिस आये।देखते ही पत्नी बोल पड़ी पूरा दिन बहार रह कर भी तुम एक गन्ना लेकर आ गये क्या खेत और गन्ने नहीं थे या फिर तुम उठा नहीं सकते थे।तुकाराम ने कहा गन्ने तो वह काफी लाये थे लेकिन रास्ते में खेल रहे बच्चों में बाँट दिए।उसकी पत्नी ने गुस्से में गन्ना उठाया और तुकाराम की पीठ पर दे मारा।गन्ने के दो टुकड़े हो गये।

तुकाराम झुके और एक टुकड़ा पत्नी को दिया और दूसरा अपने मुहँ के पास ले जाते हुए बोले मैं सोच ही रहा था इसके दो टुकड़े करने की ,अच्छा हुआ तुमने कर दिए।पत्नी अपने व्यवहार पर शर्मिंदा थी और तुकाराम मग्न होकर गन्ने का आनन्द ले रहे थे।इसका ये अर्थ नहीं है कि हम गलत बातों को सहन करें तो ही खुश रह सकते है।हाँ इतना अवश्य है कि कभी -कभी हम कुछ सहन कर लेते है तो अपने जीवन में माधुर्य को भर लेते है।अपने रिश्तों को बचाने के लिए भी आपकी सहन शक्ति ही आपका साथ देती है।जीवन में माधुर्य बनाये रखने के लिए सबसे जरुरी है सहन शक्ति ,इसे बढ़ाएं और खुश हो जाएं।

ताकत

बाल मेले में गैस के रंग बिरंगे गुब्बारों को उड़ता देख एक बालक ने गुब्बारे वाले से पूछा अंकल क्या हरे ,नीले ,पीले ,लाल इन रंग बिरंगे गुब्बारों की तरह काले रंग का गुब्बारा भी हवा में उड़ सकता है?गुब्बारे वाले ने बालक को गौर से देखा वह काले रंग का बदसूरत सा बालक फटे हाल उसके सामने खड़ा काफ़ी देर से उन उड़ते हुए गुब्बारों को बड़ी तन्मयता से देख रहा था ।उसने बालक को बताया कि ये गुब्बारे अपने रंग के कारण नही अपितु उस गैस के कारण उड़ रहे जो मैंने इन में भर दी है।बालक को उसके प्रश्न का उत्तर मिल गया था कि इन्सान यदि अपनी ताकत को पहचाने और उसका सही उपयोग करे तो सब कुछ कर सकता है।समय के साथ संघर्ष करता हुआ यहीं बालक आगे चलकर साऊथ अफ्रीका का राष्ट्रपति नेल्सन मंडेला बना।हमें ईश्वर ने अनेक शक्तियों के साथ इस संसार में भेजा है।अब ये हम पर निर्भर करता है कि हम अपनी ताकत को पहचान कर उसका उपयोग करे या जीवन भर परिस्थियों और भाग्य का रोना रोते रहे।

अहंकार

एक नदी किनारे ऊचें पेड़ पर लगा एक नारियल अक्सर नदी पड़े एक पत्थर को बड़ी हीन द्रष्टि से देख कर कहता कि तेरी भी क्या जिन्दगी है,एक यूँ ही पानी में पड़े -पड़े कीड़े तुझे खा जाएगे।पत्थर उसकी अहंकार पूर्ण बाते सुनकर भी चुप रहता।एक दिन नारियल मंदिर पहुचां जहाँ उसे भगवान के सामने तोड़ा जाना था।उसकी नजर सामने रखे शालिग्राम भगवान पर पड़ी तो उसे अपनी सोच पर ग्लानि हुई।क्योकि जिसे वह तुच्छ समझ रहा था ,वह आज भगवान बनकर पूजा जा रहा था।और स्वयं वह जो उचे पेड़ पर रहकरहमेशा गर्व से अकड़ा रहता था ,आज तोड़ा जा रहा था।इसलिय इन्सान को कभी भी किसी को कम नहीं आकना चाहिए क्या पता कल हम किस स्थिति हो।हमें अपने कर्तव्य पथ पर चलते हुए अच्छे कर्म करने चाहिए ताकि अपने साथ -साथ हम दूसरों का भी भला कर सकें। इंसान को अपने अंहकार पूर्ण व्यवहार के कारण हमेशा शर्मिंदा होना पड़ता है।