Author Archives: Dost Aapka

चुनौती

      एक इंजीनयर ने दुर्घटना में अपने दोनों पैर गवाँ दिए और इलाज के दौरान पता नहीं ऐसी कौन सी नब्ज दब गई कि उसके हाथो ने भी काम करना बंद कर दिया।प्राइवेट कंपनी में नौकरी थी सो कुछ दिनों में वह भी जाती रही।जीवन से निराश अपने निवास स्थान कोटा में एक दिन वह ईश्वर के ध्यान में मग्न था कि उसके अन्दर से आवाज आई कि मेरे हाथ -पाँव चले गए तो क्या मेरा दिमाग तो काम कर रहा है।
       उसने सोचा क्यों न मै अपने दिमाग का इस्तेमाल करके कुछ ऐसे छात्र तैयार करूँ जो तकनीकि फील्ड में भारत का नाम रोशन करने के साथ अच्छा धन भी कमा सके।अब बच्चे जुटाना भी उसके लिए एक चुनौती से कम नहीं था।एक तो अपाहिज और दूसरे पढ़ाने का कोई अनुभव नहीं था।आखिर अथक प्रयासों के बाद दो बच्चों के साथ उसने अपनी क्लासिस शुरू की।उसकी मेहनत और जज्बे ने रंग दिखाया।उसके पढाये दोनों बच्चे आई -आई टी इंजीनियरिग में चुने गये।
       धीरे -धीरे उसकी क्लास में बच्चे बढ़ने लगे,और अपनी लग्न व कठोर अनुसाशन के साथ आगे बढ़ते हुए बंसल क्लासिस आज परिचय की मोहताज नहीं है।देश के विभिन्न भागों से बच्चे यहाँ आकर अपना भविष्य बना रहे है।अपने जज्बे और जूनून के साथ चुनौतियों को स्वोकार करते हुए बंसल क्लासिस आज 35000 छात्रों को शिक्षा दे कर उनका भविष्य उज्जवल बनाने में अपना सहयोग दे रही है।
कौन कहता है आसमान में छेद नहीं हो सकता,एक पत्थर तबियत से उछालो तो यारों।जीवन में आई चुनौतियों को यदि इन्सान स्वीकार कर लग्न से अपने लक्ष्य की और बढ़े तो वह क्या नहीं कर सकता।

विन्रमता

 

         एक क्लब में ऐसी व्यवस्था थी कि सास -बहू को एक साथ सदयस्ता  लेनी पड़ती थी।कई सम्भ्रांत परिवारों की सास -बहू वहां की सदस्य थी। एक बार पिकनिक पर जाते समय एक बस में सासुए और दूसरी में बहुएं जा रही थी कि बहुओ की बस आगे निकल गई।सासुओ को अपना अपमान लगा उन्होंने ड्राइवर को बस आगे रखने को कहा।बहुए भी कहाँ पीछे रहने वाली थी सो उन्होंने अपनी बस फिर आगे करा ली।250610084236hiya_ep40_2
       इस आगे पीछे की दौड़ में सासुओ की बस खाई में गिर गई और सारी सासुए मर गई।घबराकर बहुओ के ड्राइवर ने भी बस रोक दी और वह उन्हें सांत्वना देने के लिए कहना चाहता था कि होनी पर किसी का जोर नहीं।लेकिन बहुओ के चेहरों पर ख़ुशी के भाव देखकर कुछ बोल नहीं पाया।तभी उसकी नजर एक बहू पर पड़ी जो मुहं लटकाए बैठी थी और उसे देखकर लग रहा था कि वह रोने वाली है।उसे लगा शायद इसकी सासु माँ इसे बहुत प्यार करती होगी इसीलिए यह इतनी उदास हो गई है।ड्राइवर ने उसके सिर पर हाथ रखते हुए कहा ,बेटी दुखी मत हो ,होनी पर किसका जोर है।
        इतना सुनते ही बहू सुबकते हुए बोली यही सोचकर तो मै परेशान हूँ  कि आज मेरी सासु माँ घर क्यों रह गई ? अब तो ड्राइवर सोचने पर विवश हो गया कि ऐसी क्या वजह हो सकती है कि हमारी ये मासूम बच्चियां जो शादी से पहले इतनी भावुक थी कि किसी को जरा सी चोट लग जाये तो सबसे पहले दौड़ जाती थी मदद के लिए।आज अपनी ही सासु माँ के मरने पर खुश हो रही है।
     दरसल यदि हम अपने आप को टटोलें तो जवाब हमें स्वयं मिल जायेगा कि हमारा कठोर व्यवहार ही हमारी मासूम बहुओ के दिल पर इस तरह आघात करता है कि एक दिन ऐसा भी आता है कि उनकी नारी सुलभ कोमल भावनाएं दम तोड़ देती है और वे हमारी मौत पर दुखी होने के बजाए जश्न  मनाने लगती है।
                      विन्रमता ही वह गुण है जिसके बल पर हम गैर को भी अपना बना लेते है।फिर अपनी बहुओ के साथ विन्रमता से पेश आने में कैसा संकोच ? हमारा बडप्पन हमारी विन्रमता में निहित है न कि हुक्म चलाने की प्रव्रति में।हमें कोशिश करके अपने व्यवहार को विन्रम रखना चाहिए ताकि हम प्यार के साथ -साथ सम्मान भी पा सकें।

अहम

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दो प्यारे बच्चे हर तरह से योग्य ,सहज ,सरल ,सबके काम आने वाले पति -पत्नी बनते ही बात -बात पर लड़ने लगे।एक दूसरे के पूरक बनने के बजाय अपनी अपेक्षाओ का बोझ लादने लगे।पति को शिकायत थी कि पत्नी समय पर खाना नहीं बनाती जिसकी वजह से वह अक्सर ऑफिस के लिए लेट हो जाता है। पत्नी अपनी आजादी का रोना रोती कि उसे अपनी इच्छा से कुछ भी करने की इजाजत नहीं है

        कई बार तो अपनी नादानी में वे दूर बैठे अपने माता -पिता को फोन पर अपने जीवनसाथी की कमिया बताने लगते।उनकी बातो से दुखी माँ ने उन्हें कई बार समझाने की कोशिश की ,लेकिन कुछ खास सुधार नहीं हुआ।माँ को एक उपाय सुझा उसने चंद पंक्तिया लिखकर अपने बच्चों को भेज दी
   अहम ने हमको दिया ही क्या है क्यों इसको अपनाये
   कर्तव्यो को याद रखे हम घर को स्वर्ग बनाये
 अधिकारों का रोना कैसा कर्म हो परिचय हमारा
बदले जीवन धारा ,बदले जीवन धारा
एक दूजे पर व्यंग करे क्यों कमियां क्यों गिनवाए
आगे बढ़कर हाथ थाम ले दिल में उसे बसाये
एक दूजे को खुश रखना ही लक्ष्य बने हमारा
बदले जीवन धारा ,बदले जीवन धारा।
         इन शब्दों का बच्चो पर ऐसा असर हुआ कि अब वे दोनों एक दूसरे में सिर्फ खूबियाँ ही देखने लगे और सही मायने में एक दूसरे के पूरक बन गये।पति पत्नी के रिश्ते में अहम की कोई जगह नहीं होती।जब यह दोनों के बीच रहेगा ,आपस में प्यार होते हुए भी चैन से जीने नहीं देगा।

स्पर्श


700-00519483एक माँ जो अपने बेटे से अलग रहने को विवश थी क्योकि उसके पति व बेटे की नहीं बनती थी।एक बार माँ को पता चला कि उसका बेटा कई दिनों से बीमार है और कोई दवाई असर नहीं कर रही है ,तो वह व्याकुल हो गई।उसने अपने पति से बेटे से मिलने की अनुमति चाही तो पति ने मना करते हुए कहा कि यदि तू उससे मिलने जाएगी तो मै तुझसे सम्बन्ध तोड़ लूँगा।
पति की बात से डरी हुई इस माँ का दिल हर वक्त अपने बीमार बेटे में ही लगा रहता।एक दिन सुबह अपने पति को नाश्ता देकर पूजा की थाली हाथ में लिए माँ मंदिर के बहाने घर से निकल गई।उसने लम्बा सा घुंघट निकाला और अपने बेटे के पास पहुँच गई,जो कई दिनों से बुखार में बेसुध पड़ा था माँ के कदमों की आहट से उठ गया।वर्षो बाद माँ को सामने पाकर बेटा भावुक हो गया।
माँ ने आगे बढ़कर बेटे के सिर पर हाथ फेरा,उसका स्पर्श पाते ही बेटे के कमजोर शरीर में नई शक्ति का संचार हो गया।बेटा उठा और अपनी माँ से लिपट कर रोने लगा।दूर खड़ी उसकी पत्नि माँ बेटे के इस मिलन को आश्चर्य से देख रही थी जिसमे न कोई गुस्सा न शिकायत बस प्यार ही प्यार था जिसके वशीभूत वे दोनों बस रोये जा रहे थे।
बेटे की सारी पीड़ा व महीनो पुराना बुखार माँ का स्पर्श पाते ही दूर हो गये थे।बेटे को ठीक देख माँ वहाँ से चल पड़ी और है।
रास्ते में बैठे भिखारी को पूजा का सामान देकर घर पहुंच गयी।पति को चुप देखकर उसने कहना शुरू किया कि मंदिर में ज्यादा भीड़ थी इस लिए देर हो गई ,पति जो कि पत्नि के पीछे जाकर सारा द्रश्य अपनी आखों देख चुके थे अपने आंसू छुपाते हुए बोले कोई बात नहीं,यदि तुम चाहो तो रोज मंदिर चली जाया करो।
माँ के स्पर्श के महत्व को हम सभी नें अपने जीवन में महसूस किया है।जब कभी भी हम मुश्किल में होतेहै तो माँ दूर होते हुए भी हमारी प्रेरणा बनकर हमारे साथ होती है।

मेहनत

     एक गरीब महिला ने अपनी व्यथा सुनाते हुए एक संत को बताया कि छोटी सी उम्र में ही उसका पति गुजर गया है।उसके पास किराया देने व खाने तक के पैसे नहीं है ,यदि आप कृपा करके मेरे लिए कुछ दिनों का इंतजाम कर दे तो आपका आभार होगा। संत ने मदद का आश्वाशन देते हुए कहा यदि मै तुम्हें काम दिला दूँ क्या तुम करोगी ? महिला के मानने पर संत ने उसे चपरासी की नौकरी पर लगवा  दिया।वहां काम करते हुए उसने कर्म के महत्व को जाना और अपनी कमाई से थोड़ी -थोड़ी बचत करके उसने काम के साथ पढाई भी की। आज वह महिला एक कालिज में अध्यापक है।develop-perseverance

सही सोच हो ,सही द्रष्टि हो सही हो कर्म हमारा।
बदले जीवन धारा। बदले जीवन धारा।
 मेहनत को ही दीप बनाये ,लग्न को समझे ज्योति।
पत्थर में से हीरा जन्मे और सागर से मोती।
बाधाओं से डरना कैसा ,मिलता स्वयं किनारा।
 बदले जीवन धारा , बदले जीवन धारा।
      जिन्दगी हमें स्वयं कुछ नहीं देती।हमें मेहनत करके ही अपना भाग्य बनाना पड़ता है।

अनुभूति

 

     एक लड़की जब अपने मायके जाती ,उसे अपने पिता की कोई न कोई बात बुरी लग जाती और वह अक्सर दुखी मन से वापिस लौट आती।कई बार सोचती ,अब नहीं जाऊँगी लेकिन माँ से मिलने का मोह उसे मायके खीच ले जाता।और फिर वही सब होता ,जो हमेशा से हो रहा था।उसकी अति संवेदन शीलता की वजह से उसके बच्चे भी अपने ननिहाल में रहने का सुख नहीं देख पाए।वह जब कभी मायके जाती तो उसकी माँ खुश होने के साथ डरी हुई भी रहती कि कही इस बार यह रोते हुए ही वापिस न लौट जाये।
Father-Daughter
            शादी के लगभग 24 साल बाद एक बार वह बिना किसी बात बुरा माने वापिस गयी तो उसकी माँ ने उसे बताया कि उसके पिता इस बात से बहुत खुश है कि आज उनकी बेटी ख़ुशी से विदा हुई।लड़की सोचने पर विवश हो गई कि वह अपने पिता की छोटी सी डाट को तो दिल से लगा लेती है ,लेकिन उस असीम प्यार को नहीं समझी  जो उनके दिल में अनवरत बसा है।
       उसकी माँ के अचानक हुए देहांत से दुखी पिता के लिए कुछ करना चाहती थी कि उसके पति की नौकरी चली गई।उसके पिता उससे मिलने आये तो उनकी आखों में  अपनी बेटी के भविष्य की चिंता साफ नजर आ रही थी।बेटी जिसे अपने पिता के प्यार की अनुभूति हो चुकी थी,बस इतना ही कह पाई कि उसे उनके आशीर्वाद की बहुत जरूरत है।पिता का प्यार बच्चो के लिए ऐसा साहस है जिसकी बदोलत वह बड़ी से बड़ी मुश्किल का सामना कर सकते  है।

संयम

एक साधरण सा दुकानदार था ,जिसके बारे में प्रसिद्ध था कि वह बहुत संयमी है।एक बड़ी मिल का मालिक उसकी परीक्षा लेने उसकी दुकान पर गया।उसने दुकानदार से कपड़ा दिखाने को कहा। लगभग डेढ़ घंटे तक वह एक के बाद दूसरा थान खुलवाता रहा और दुकानदार बिना संयम खोये उसे कपडे दिखाता रहा।आखिर ग्राहक ने आधा मीटर कपडा देने को कहा।  दुकानदार  ने ग्राहक को आधा मीटर कपडा देते हुए धन्यवाद दिया।

patience

            ग्राहक जो कि अभी तक उसका संयम देख कर बहुत प्रभावित हो चुका था।अपना असली परिचय देते हुए बोला मै तुम्हें अपनी कंपनी में विक्रेता के पद पर नियुक्त करता हूँ।क्या तुम यह काम करोगे ?दुकानदार ने सहर्ष काम करना शुरू कर दिया।अपने संयम के कारण एक साधारण सा दुकानदार आज लखपति बन गया था।
      आर्टियस वार्ड ने कितना ठीक कहा है जो लोग जल्दबाजी में अपना लक्ष्य पाने के लिए घोड़ा ,टट्टू ,खच्चर किसी पर भी सवार हो जाते है ,एक दिन मुहँ के बल गिरते है।इस लिए हमें हमेशा संयम के साथ अपना काम करना चाहिए।आत्मसंयम ही सफलता का मूल मन्त्र है।

आत्मविश्वास

 

          एक युवक जो की पढाई में सामान्य था और मुश्किल से पास हो पाता था।उसने सैनिक भर्ती के लिए आवेदन दिया।कई बार की कोशिशो के बाद उसका सलेक्शन हो गया।उसके जानकारों ने मजाक उड़ाते हुए कहा ये क्या करेगा ,कोई अंग तुड़वाकर वापिस आ जायेगा।  

         उनके आश्चर्य का तब ठिकाना न रहा जब उन्होंने सुना कि युद्ध में उस युवक ने जलते हुए बम विरोधी सेना पर बरसाए और गोलियों की बौछार में अपने साथी की जान बचाई।
       उस वीर युवक के शब्द है ,”युद्ध में बंदूके नहीं सैनिको का आत्मविश्वास लड़ता है।”
संसार में अगर कोई प्रेरणा शक्ति है तो वह है आत्मविश्वास।जिसके बल पर व्यक्ति असम्भव को भी सम्भव कर देता है।

एकाग्रता

           

         एक आदमी नदी किनारे सूर्य की पूजा में तल्लीन था कि उधर जा रहे एक जोगी बाबा ने उस पर पानी उछालना शुरू कर दिया।उस आदमी ने गुस्से में बाबा से कहा ,आपने पानी गिरा कर मेरा ध्यान भंग क्यों किया। बाबा तो  अंतर्मन को जानने वाले थे ,बोले तू तो जूते खरीदने में लगा था।पूजा कर ही कहाँ रहा था कि मैंने भंग कर दी? आदमी अपनी सोच पर शर्मिंदा हुआ क्योकि असल में पूजा करते समय उसके मन में नए जूते खरीदने का ही विचार आ रहा था।उसने बाबा से माफ़ी मागीं और आगे से अपने मन को एक्राग  करके काम करने का निश्चय किया।
         जब हम किसी काम को पूरी एकाग्रता से करते है तो हमें सफलता अवश्य मिलती है। हमे कोशिश करके अपने भटकते मन को रोक कर अपने लक्ष्य तरफ लगाना चाहिए ,ताकि हमें अपनी  मेहनत का पूरा फल मिल सके।